अखिलेश ने ‘साइकिल’ पर बैठाया लेकिन सवारी नहीं कराई, अब ‘हाथी’ बन रहा इन नेताओं का साथी! – mayawati imran masood bsp join akhilesh yadav sp dalit muslim unity ntc

पश्चिम यूपी के मुस्लिम चेहरा माने जाने वाले पूर्व विधायक इमरान ने एक बार फिर से दल-बदल किया. सपा की ‘साइकिल’ से उतरकर बसपा की ‘हाथी’ पर सवार हो गए हैं. मसूद ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को अलविदा कहकर सपा का दामन थाम लिया था. आजमगढ़ की मुबारकपुर सीट विधायक रहे शाह आलम उर्फ ​​​​ भी बसपा छोड़कर सपा में गए थे. अखिलेश यादव ने इन दोनों ही नेताओं को साइकिल पर बैठाया, लेकिन टिकट ना देकर विधानसभा की सवारी नहीं कराई. गुड्डू जमाली हों या फिर इमरान मसूद दोनों के लिए का हाथी बन रहा है.

ने बुधवार को बसपा प्रमुख मायावती से लखनऊ में मिलकर की सदस्यता ग्राहण कर ली. इस दौरान उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधा और दलित-मुस्लिम एकता बनाने की बात कही. इमरान मसूद ने कहा कि मुसलमानों ने 2022 के चुनाव में अपना सब कुछ अखिलेश के साथ दांव पर लगा कर देख कि वह बीजेपी को हरा सकते. जब मुसलमानों ने सपा को मजबूत किया है, में बीजेपी को ही फायदा हुआ. जब-जब मायावती को समर्थन दिया, तब-तब बीजेपी कमजोर हुई है. मायावती ने उन्हें बसपा के भाईचारा कमेटी का पश्चिमी उत्तर का संयोजक बना दिया है.

के सामने बड़ा चैलेंज
के सामने अपना वजूद साबित करने की चुनौती है. में वह लगातार एक के एक चुनाव जा रहे हैं. 2006 नगर पालिका बने साल 2007 विधायक. इमरान मसूद कोई भी चुनाव नहीं जीत पाए, दोबारा विधायक बने और ना ही कभी सांसद. , बार लड़ते हैं.

मसूद कांग्रेस में रहते हुए गांधी परिवार का करीबी माने जाते और पश्चिमी यूपी में उनकी मर्जी से फैसला होता था. वह 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस छोड़कर सपा में शामिल हो गए. यादव ने मसूद को पार्टी में तो लिया, उन्हें किसी सीट से टिकट नहीं दिया और न ही एमएलसी बनाया. इतना ही नहीं, मसूद के साथ सहारनपुर देहात सीट से विधायक रहे मसूद अख्तर भी सपा में आए, लेकिन उन्हें भी टिकट नहीं दिया था.

कमजोर हुई मसूद की पकड़
सांसद काजी रशीद मसूद के निधन के बाद में मुस्लिमों पर इमरान मसूद की हुई है जबकि मुस्लिम नेता काफी मजबूती से हैं. में अखिलेश यादव सहारनपुर जिले की सियासी को समझते हुए इमरान मसूद उनके साथ आए हुए बजाय उनकी के वफादार नेताओं को लड़ाया, जो जीतकर बने. ही नहीं सपा ने मसूद के बजाय शाहनवाज खान को विधान परिषद भेजा.

के पास किसी तरह का सियासी विकल्प नहीं बचा था, चलते उन्होंने सपा को अलविदा कहा. निगम में मेयर का चुनाव लड़ने के मद्देनजर इमरान मसूद बसपा का दामन थामा है. 2017 निगम चुनाव में हाजी फजलुर्रहमान 2000 से मेयर का चुनाव हार गए थे, लेकिन 2019 में सांसद बन गए. में इमरान मसूद सांसद और विधायकी के बजाय मेयर का चुनाव के हाथी पर सवार हो गए हैं, लेकिन उनके लिए ये सियासी राह आसान है.

के 4 चेहरे
में मुस्लिम सियासत के बड़े चेहरे हैं, जिनमें पहला सांसद फजलुर्रहमान, दूसरा सपा विधायक उमर खान, तीसरा नाम आशू मलिक और चौथा नाम एमएलसी शाहनवाज खान हैं. इन्हीं नेताओं के इर्द-गिर्द सहारनपुर की सियासत सिमटी हुई है. वजह से इमरान मसूद अपना सियासी वजूद बचाए रखने के लिए से उतरकर हाथी पर सवार हो गए हैं. में सपा सहारनपुर नगर निगम चुनाव में मुस्लिम समुदाय के ओबीसी से मलिक जाति से कैंडिडेट उतारने की तैयारी में है.

मसूद से पहले मुबारकपुर से विधायक रहे शाह गुड्डू जमाली भी 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा छोड़कर सपा गए थे, अखिलेश यादव ने उन्हें टिकट नहीं दिया था. बाद वो ओवैसी की पार्टी से चुनाव लड़े, सपा के आगे जीत नहीं सके. आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव में में वापसी कर गए, बाद मायावती ने उपचुनाव लड़ाया था. चुनाव में गुड्डू जमाली जीत तो नहीं सके, सपा को हराने में कामयाब रहे.

-मुस्लिम समीकरण को बनाने में जुटी मायावती
आजमगढ़ उपचुनाव के बाद से दलित बनाने है, लेकिन बसपा पर बी टीम आरोपों मुस्लिम साथ नहीं आ हैं. मुसलमान यूपी में अभी भी के साथ दिख रहा है, साथ लेने के हरसंभव कर रही है, विश्वास हासिल नहीं कर पा रही है. कड़ी में शाह आलम उर्फ ​​जमाली बाद इमरान मसूद की बसपा एंट्री , दोनों ही लिए मुस्लिम अपने सियासी को बचाए रखने की चुनौती है.

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