जिस दिग्गज नेता ने अभिताभ से यह कहा था, पहली बार में ही उन्हें 1.87 लाख वोट से हराया | Amitabh Bachchan Mulayam Singh Yadav Friendship Story | UP News

घंटा पहले:

साल 1993… मुलायम ने दूसरी बार UP की कुर्सी संभाली थी। उन्होंने ‘यश भारती सम्मान’ की शुरुआत की। CM बनने के एक साल बाद, यानी 1994 में पहली बार लखनऊ में हरिवंश राय बच्चन को यह सम्मान दिया जाना था। मगर, कार्यक्रम से पहले अमिताभ बच्चन ने बताया कि बाबू जी कि तबीयत ठीक नहीं है। से लखनऊ नहीं आ पाएंगे।

अमिताभ की बात सुनकर मुलायम बोले, “मैं खुद मुंबई जाकर हरिवंश जी को सम्मानित करूंगा।” की इस दरियादिली का जिक्र अमिताभ बच्चन आज भी कई मंचों पर करते हैं। इसके बाद मुलायम ने 2007 में अमिताभ को UP का ब्रांड एम्बेसडर बनाया। बिग-बी ने कहा था- UP बहुत दम है, क्योंकि जुर्म यहां कम है।

बिग-बी ने जब मुलायम के साथ UP का प्रचार किया, तब लोगों के जहन में 1984 वाले अमिताभ की यादें ताजा हो गईं।

  • 80वें जन्मदिन पर चलिए उनकी पॉलिटिकल जर्नी पर चलते हैं…

ये तस्वीर उसी दिन की है, जब मुलायम सिंह ने अमिताभ बच्चन के घर जाकर उनके पिता हरिवंश राय बच्चन को सम्मानित किया था।

38 पहले कांग्रेस के मास्टर स्ट्रोक से…
साल 1984…इंदिरा गांधी की मौत के सदमे से कांग्रेस उबर भी नहीं पाई थी कि लोकसभा चुनाव का ऐलान हो गया। पार्टी जानती थी कि इंदिरा के जाने के बाद UP में सिंपथी वोट मिल जाएंगे। , इलाहाबाद सीट (अब प्रयागराज) को लेकर कांग्रेस चिंता में थी। चिंता जायज भी थी, क्योंकि यहां से लोकदल के प्रत्याशी हेमवती नंदन बहुगुणा उतरे थे। जो UP की राजनीति के पुराने खिलाड़ी थे।

नामांकन की तारीख खत्म होने में केवल 24 घंटे बचे थे। तभी अचानक कांग्रेस दफ्तर से सूचना आती है, “इलाहाबाद सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी अमिताभ बच्चन होंगे।” इलाहाबाद की फिजा बदल गई। अगले दिन अमिताभ का रोड शो हुआ। उनका काफिला आनंद भवन होते हुए यूनिवर्सिटी पहुंचा, तो गर्ल्स हॉस्टल की लड़कियों ने उनके समर्थन में अपने दुपट्टे बिछा दिए।

1984 के दौरान इलाहाबाद में जनता के बीच अमिताभ।

1984 के दौरान इलाहाबाद में जनता के बीच अमिताभ।

के काफिले में जया और भाई अजिताभ भी साथ थे। , की निगाहें अमिताभ की तरफ थीं। इसी बीच हॉस्टल से भागती आईं कुछ लड़कियों ने अमिताभ की तरफ अपना हाथ बढ़ा दिया। हाथ छूते हुए आगे बढ़ गए।

नए-नवेले नेता पर बनाए गए, अजब-गजब चुनावी नारे
इलाहाबाद की सड़कों पर जब-जब भी अमिताभ की रैलियां निकलती, उसके पीछे-पीछे युवाओं का हुजूम उमड़ पड़ता। इतनी भीड़ जुटती कि लोगों को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता। इन सब के बीच बहुगुणा को कहीं न कहीं अपनी सियासी जमीन खिसकती नजर आने लगी।

हालांकि, बहुगुणा ने भी अमिताभ के खिलाफ प्रचार करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। कई बार उन्होंने अमिताभ को नचनिया बोला। इसी दरम्यान बिग-बी के खिलाफ कई नारे बनाए गए।

  • ग्राफिक के देखते हैं…

विरोधी की रैली में पहुंचे और कहा- आप लोग मुझे वोट दीजिएगा

की रैलियों में जुटती भीड़ को देख विरोधी कहते थे कि ये भीड़ अभिनेता अमिताभ को देखने आई है, किसी नेता को नहीं।

की रैलियों में जुटती भीड़ को देख विरोधी कहते थे कि ये भीड़ अभिनेता अमिताभ को देखने आई है, किसी नेता को नहीं।

पर हेमवती सभा कर रहे थे। सामने से अमिताभ का जुलूस निकलता है। जुलूस में शोर होने से बहुगुणा भाषण देते-देते चुप हो गए। नजर बहुगुणा पर पड़ी। तुरंत जीप से उतर कर मंच पर चढ़े और उनका पैर छू लिया। रह …। कुछ देर बाद अमिताभ से बोले, “तुम जीत जाओगे, लेकिन यहां आए हो तो कुछ तो बोल कर जाओ।”

कुछ समझ ही नहीं आया कि क्या बोलें? कुछ देर शांत रहे, जनता की तरफ घूमे और कहा, ”आप लोग हमें वोट दीजिएगा।”

पर अमिताभ के नाम के आगे दिखे लिपस्टिक के निशान

1984 में जब अमिताभ गांवों में प्रचार के लिए पहुंचते, तो महिलाएं पहले से माला लेकर उनका इंतजार करती थीं।  भी उनका हाथ थामकर उनकी बातें ध्यान से सुनते थे।

1984 में जब अमिताभ गांवों में प्रचार के लिए पहुंचते, तो महिलाएं पहले से माला लेकर उनका इंतजार करती थीं। भी उनका हाथ थामकर उनकी बातें ध्यान से सुनते थे।

हो थे। था। के बाद एक बैलेट बॉक्स खुल रहे थे और वोटों की गिनती चालू थी। बीच मतगणना अधिकारी को कुछ बैलेट पेपर्स पर अमिताभ के नाम के आगे लिपस्टिक के निशान दिखे। रात 10 बजे तक चली काउंटिंग में करीब 4 हजार बैलेट पेपर ऐसे मिले, जिनमें लिपस्टिक लगी हुई थी। कमीशन ने ऐसे सभी बैलेट पेपर्स को रद्द कर दिया।

4 हजार वोट बर्बाद होने के बावजूद अमिताभ को 68.21% वोट मिले। उन्होंने अपने विरोधी और UP के पूर्व CM बहुगुणा को 1 लाख 87 हजार 795 वोटों से हरा दिया। की इस जीत के साथ बहुगुणा का राजनीतिक करियर भी खत्म हो गया।

  • अभी खत्म हुई है…

तक आपने अमिताभ की राजनीतिक पारी के बारे में जाना। पॉलिटिक्स से दूरी की कहानी जान लेते हैं…

फिल्म और पॉलिटिक्स के लिए अलग-अलग स्टाफ

इलाहाबाद सीट से चुनाव जीतने के बाद अमिताभ पॉलिटिक्स और बॉलीवुड का काम साथ-साथ देखने लगे।  तस्वीर में अमिताभ 'आखिरी रास्ता' फिल्म की स्क्रिप्ट डिस्कस कर रहे हैं।  फिल्म 1986 आई थी।

इलाहाबाद सीट से चुनाव जीतने के बाद अमिताभ पॉलिटिक्स और बॉलीवुड का काम साथ-साथ देखने लगे। तस्वीर में अमिताभ ‘आखिरी रास्ता’ फिल्म की स्क्रिप्ट डिस्कस कर रहे हैं। फिल्म 1986 आई थी।

अब अमिताभ सुपरस्टार के साथ-साथ नेता भी बन गए थे। नई दिल्ली के मोतीलाल मार्ग पर 2F वाला बंगला उन्हें रहने को भी मिला। यह वही बंगला था, जहां प्रधानमंत्री बनने के पहले राजीव का दफ्तर हुआ करता था। सांसद बनने के बाद फिल्मों का काम देखने अमिताभ बच्चन का स्टाफ मुंबई से दिल्ली आता। , पॉलिटिकल वर्क के लिए अमिताभ ने नया स्टाफ रखा हुआ था।

बिजी रहने का फायदा राजनीतिक विरोधियों ने उठाया

1985 में आई फिल्म मर्द में दिखे।  फिल्म के प्रमोशन में उनकी व्यस्तता बढ़ने से उनका राजनीति से जुड़ाव कम हो रहा था।  मर्द फिल्म की शूटिंग के दौरान की है।

1985 में आई फिल्म मर्द में दिखे। फिल्म के प्रमोशन में उनकी व्यस्तता बढ़ने से उनका राजनीति से जुड़ाव कम हो रहा था। मर्द फिल्म की शूटिंग के दौरान की है।

अमिताभ बच्चन की कई फिल्में भी रिलीज हुईं। ‘मर्द’ ने अच्छी कमाई की। में व्यस्त रहने से अमिताभ इलाहाबाद और राजनीति से दूर होते जा रहे थे, जिसका फायदा उनके राजनीतिक विरोधियों ने जमकर उठाया। ने उनका नाम पहले बोफोर्स और फिर फेयरफैक्स और पनडुब्बी घोटालों में घसीटा।

के बाद राजीव गांधी ने इस्तीफा मांग लिया

राजनीति में आने के 3 साल बाद अमिताभ ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।

राजनीति में आने के 3 साल बाद अमिताभ ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।

एक के बाद एक 3 बड़े घोटालों में उनका नाम घसीटा गया। वरिष्ठ पत्रकार कुमकुम चड्ढा ने साल 2019 में एक इंटरव्यू में बताया कि उनके पास ज्यादा सबूत तो नहीं हैं, लेकिन बोफोर्स घोटाले में नाम आने पर राजीव गांधी ने अमिताभ से इस्तीफा देने को कहा था। बात अमिताभ को बहुत बुरी लगी और 1987 में उन्होंने राजनीति को अलविदा कह दिया। इसके बाद अमिताभ दूसरे नेताओं के साथ कभी-कभार राजनीतिक मंचों पर नजर आते थे। बाद जब भी उनसे पूछा कि क्या आप पॉलिटिक्स में वापसी करेंगे? उनका एक ही जवाब होता- “राजनीति मेरे बस की बात नहीं है।”

के आखिर में एक बार फिर मुलायम के उस बयान पर चलते हैं, उन्होंने अमिताभ से जुड़े सवालों विरोधियों को दिया था…

UP का ब्रांड एम्बेसडर बनने के बाद मुलायम के साथ मंच पर अमिताभ बच्चन।

UP का ब्रांड एम्बेसडर बनने के बाद मुलायम के साथ मंच पर अमिताभ बच्चन।

अमिताभ को UP का ब्रांड एम्बेसडर बनाने पर मुलायम पर सवाल उठने लगे थे। कह रहे थे कि उन्होंने पार्टी के प्रचार लिए अमिताभ का इस्तेमाल किया है।

मुलायम सिंह यादव ने जवाब दिया था :

“हम नहीं चाहते कि अमिताभ हमारे लिए प्रचार करें। वह दुनिया में सबसे बड़े कलाकार हैं…नायक हैं। ऐसे व्यक्ति को हम विवाद में नहीं फंसाना चाहते।”

:

  • श्रीवास्तव की किताब Amitabh – A personality.
  • भारती की किताब अमिताभ बच्चन – जीवन गाथा।
  • इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर SK यादव से बातचीत के आधार पर।
  • रहने वाले लोगों से बातचीत के आधार पर।
  • पत्रकार कुमकुम चड्ढा के BBC को दिए इंटरव्यू के आधार पर।

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