जो जितनी खूबसूरत उसकी उतनी ही कीमत, बेटी को नहीं बेचा तो मां से रेप | It is written on the stamp that she is adopting, sold a 12-year-old girl 3 times, 4 abortions

जयपुर2: सिंह सोलंकी/रणवीर चौधरी

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’21 की थी, मुझे बंधक बनाया गया। भागने की कोशिश की, गई। की गैंगरेप। बार भागते हुए पकड़ी गई तो तब तक मेरे साथ गैंगरेप किया गया, जब तक मैं बेहोश नहीं हो गई। दिन मौत से बदतर था।’

कहानी है नोबेल पुरस्कार विजेता इराक की नादिया मुराद की। जिसे आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (IS) ने सेक्स स्लेव बना दिया। नादिया ने ‘लास्ट गर्ल : मेरी कैद और इस्लामिक स्टेट के खिलाफ मेरी लड़ाई’ किताब में अपनी आपबीती लिखी है।

नादिया ऐसा नर्क भोगने वाली लास्ट गर्ल नहीं है, इसी का सबूत है दूसरी कहानी जो भीलवाड़ा से जुड़ी है।

2
’12 की थी, मुझे खरीद लिया गया। महज 12 साल की उम्र में मुझे 5 लड़कियों के साथ एक कमरे में बंद रखते थे। भूखा गया। दिन 15-20 आते। खुश नहीं होता था तो शरीर पर सिगरेट दाग देता।’

सीरिया-इराक में जिस तरह IS मासूम लड़कियों को ‘गुलाम’ बना रहा है, वैसा ही घिनौना जुर्म राजस्थान के आधा दर्जन जिलों में जातीय पंच कर रहे हैं। 8 से 18 साल की लड़कियों को नीलामी कर बेचा जा रहा है। UP, MP, मुंबई, दिल्ली और विदेश तक भेजा जा रहा है।

इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट में पढ़िए- जातीय पंच कैसे चला रहे हैं ये घिनौना रैकेट…

बनकर पहुंची भास्कर टीम

भास्कर टीम जयपुर से करीब 340 किलोमीटर का सफर करके भीलवाड़ा के पंडेर गांव पहुंची। कई बस्तियों में गरीब परिवारों की लड़कियों को दलाल स्टाम्प पेपर पर खरीदकर बेच देते हैं।

बस्तियों में जाकर लोगों से बात करने की कोशिश की, लेकिन दलालों के डर से कोई तैयार नहीं हुआ। बाद हम गांव में पानी की समस्या को हल करने के लिए सर्वे वाले बनकर गए।

हमें अपनी समस्याएं बताईं। कुछ लोगों को विश्वास में लेकर हमने लड़कियों की खरीद फरोख्त के बारे में पूछताछ की। इलाके के लोगों ने जो कुछ बताया, वो हैरान करने वाला था।

समाज के पंच महज एक सफेद कागज पर फैसला सुनाते हैं, जिसमें लड़की के घरवालों पर लाखों रुपए का जुर्माना होता है।  पर दोनों पक्ष, गवाह और खुद पंच के साइन होते हैं।

समाज के पंच महज एक सफेद कागज पर फैसला सुनाते हैं, जिसमें लड़की के घरवालों पर लाखों रुपए का जुर्माना होता है। पर दोनों पक्ष, गवाह और खुद पंच के साइन होते हैं।

पर चढ़ाते हैं लाखों का कर्जा

भीलवाड़ा में कई बस्तियां हैं, जहां आज भी दो पक्षों के बीच कोई विवाद या झगड़ा हो तो पुलिस के पास नहीं जाते। के लिए जातीय पंचायत बिठाई जाती है। से लड़कियों को गुलाम बनाने का खेल शुरू होता है। कोई भी विवाद हो, जातीय पंचायत कभी भी पहली मीटिंग में फैसला नहीं सुनाती। पंचायत है। हर बार जातीय पंचों को बुलाने के लिए दोनों पक्षों को करीब 50-50 हजार रुपए का खर्चा करना पड़ता है। इसके बाद जिस पक्ष को पंचायत दोषी मानती है उस पर 5 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाता है।

फिर कर्जा उतारने के लिए बहन-बेटियों को बिकवाते हैं

जातीय पंचायत में जिस पर लाखों का जुर्माना लगता है, उस पर पंच घर की बहन-बेटी को बेचने के लिए दबाव डालते हैं। उतारने पर समाज से बाहर करने की धमकी दी जाती है। पंच दलाल बनकर लड़कियों को खरीदारों के जरिए बिकवाते है। हर डील में कमीशन मिलता है। इसी कमीशन के लिए जातीय पंच गरीब परिवारों पर लाखों रुपए का जुर्माना लगाते हैं, ताकि वह कर्जा उतारने के लिए अपने घर की लड़कियों को बेचने के लिए मजबूर हो जाएं।

लड़कियों की तलाश करते हुए हम भीलवाड़ा से अजमेर के नारी निकेतन और चिल्ड्रन होम पहुंचे। जहां कुछ समय पहले महज 10 से 18 की साल की लड़कियों को पुलिस ने पंडेर गांव में दबिश देकर रेस्क्यू किया था। लड़कियों ने बताया कि किस तरह उन्हें जानवरों की तरह टॉर्चर किया गया…

केस 1 : 5 लाख के कर्ज के लिए पांचों बहनों को बेच दिया

‘मेरा नाम कविता (बदला हुआ नाम) है। की रहने वाली हूं। पिता पर जातीय पंचायत के कारण करीब 15 लाख रुपए का कर्जा हो गया। उतारने के लिए पिता ने सबसे पहले मेरी बुआ को बेचा था।’

‘इसके बाद मेरी तीन बड़ी बहनों को बेच दिया था। बाद भी कर्जा नहीं उतरा तो मुझे भी बेच दिया। समय मेरी उम्र महज 12 साल थी। मुझे खरीदार ने आठ लाख रुपए में 15 साल के लिए खरीदा था। मुझे MP ले गया।’

‘जिंदगी नर्क हो गई थी। में सिर्फ एक बार राखी के त्योहार पर घर भेजते। ग्राहक खुश होकर अलग से जो रुपए देते, वो घर जाकर अपने पिता को दे देती। बाद भी मेरे पिता का कर्जा नहीं उतरा तो उन्होंने मेरी छोटी बहन को भी बेच दिया। हम पांचों बहनें गुलाम बन गईं, लेकिन आज भी पिता का कर्जा नहीं उतरा है।’

2 : को नहीं बेचा तो रेप, कार से फेंका

‘मेरा नाम सविता है। रहने हूं। मैं 10 लाख का कर्जा नहीं चुका पाई तो दलाल दबाव बनाने लगे कि मैं अपनी बेटी को बेच दूं। दिन दलाल मुझे बात करने के लिए बहाने कार में बिठा कर ले गए। पहले मेरे साथ रेप किया फिर मेरी 12 साल की बेटी को बेचने के लिए दबाव बनाने लगे। मेरे कपड़े उतार दिए और जान से मारने की धमकी दी कि तेरी बेटी को यहां लेकर आएगी तभी तुझे जाने देंगे।’

‘जख्म भर गए, लेकिन उनके निशान अब भी शरीर पर है। पुलिस के पास शिकायत लेकर जाती तो पंच हमें समाज से बाहर करने की धमकी देते। आज भी बेटी को बेचने के लिए दबाव बनाते हैं। तो जिंदगी भर की कमाई कर्ज में निकल जाएगी पर कर्जा नहीं चुका पाऊंगी।’

3 : 3 बार बेचा गया, 4 बार अबॉर्शन

‘मेरा नाम गायत्री है, उम्र 12 साल थी, जब पिता और दादी के साथ भीलवाड़ा के इतोंदा गांव में रहती थी। में ही मैंने मां को खो दिया, उनके इलाज में इतना कर्जा हुआ कि पिता को घर बेचना पड़ा। दादी बीमार हुई तो पिता पर 6 लाख का कर्जा और चढ़ गया।

के कारण घर से बाहर ही रहते थे। मुझसे घर का सारा काम कराती और मेरे साथ मारपीट करती।’

‘एक दिन घर में मैं टीवी देख रही थी, तभी घर के बाहर एक गाड़ी आई। कुछ देर बाद दादी आई और बोली-बाहर चल तुझे कोई देखने आया है। साथ है। किया तो दादी मारते हुए मुझे कमरे से बाहर ले आई। एक महिला के साथ तीन लोग आए हुए थे।’

‘जयपुर में लाने के बाद मुझे एक मकान में ले गए। पहले से 10 से 14 साल की चार लड़कियां थी। हमें आगरा ले गए। ने हमें गलत काम करने के लिए कहा। मना कर तो हाथ-पैर बांधकर एक कमरे में बंद कर दिया। रखा। – हमारी बात मानोगी, खाना मिलेगा। दिन एक लड़के ने मेरे साथ दुष्कर्म किया। बाद हमसे रोज गलत काम करवाते थे।’

‘जब मैं खरीदार की बात नहीं मानती थी और घर जाने की जिद करती थी तो उन्होंने एक बार मेरी घर पर फोन पर बात करवाई थी। फोन पर बोली- तू इनकी बात क्यों नहीं मानती। वापस आ गई तो बहुत मारूंगी।’

‘आगरा में रोज 30 से 40 ग्राहक आते थे। बन थी। होता था कि बता नहीं सकती। मैं मौका पाकर वहां से भाग गई। मार्केट से बस स्टैंड पहुंचती उसे पहले ही मुझे उन्होंने पकड़ लिया।’

खरीदार ने मुझे एक दिन दिल्ली में एक दलाल को 6 लाख रुपए में बेच दिया। दिल्ली गया। मुझे एक खरीदार को सौंप दिया। 4 मैं वहां रही। मैं प्रेग्नेंट हो गई।

‘ग्राहकों में एक लड़का मेरे पास बार-बार आता था। कि वो मुझसे प्यार करता है। ले जाएगा और शादी करेगा। साथ एक और लड़की ने अपने दोस्त के साथ भागने का प्लान बनाया। और लड़कियां तैयार थीं, वहां से भागने के लिए।’

‘एक दिन दोपहर में मैं और मेरे साथ वाली एक लड़की अपने दोस्तों के साथ भाग गई, लेकिन दो लड़कियां भागते समय पकड़ी गईं। मेरे दोस्त के साथ जयपुर आ गई।’

राजस्थान की बेटियों-बच्चियों की झकझोर देने वाली आपबीती पढ़ने के बाद नीचे दिए गए पोल में हिस्सा लेकर इस बेहद गंभीर मसले पर आप अपनी राय दे सकते हैं।

नजर नहीं आईं बेटियां

गांव में आलीशान कोठियां बनवा रखी हैं। उनके खौफ के सामने कोई पुलिस और प्रशासन के सामने बोलने की हिम्मत नहीं करता है। भास्कर टीम पंडेर, जहाजपुरा, मांडलगढ़ के कई गांवों में पीड़ित परिवारों से मिली। घरों में कर्ज से लदे मां-बाप लेकिन बेटियां नहीं थीं।

ज्यादातर लोग करते हैं मजदूरी

के पंडेर गांव में रहने वाले सुरेश ने बताया कि हमारे पूर्वजों ने स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी थी। हमेशा से जंगलों में रहे। हमारे पास कभी जमीन नहीं रही, इस वजह से खेती से भी नहीं जुड़ पाए। के बाद कई लोगों ने जीने के लिए चोरी करना शुरू कर दिया।

पर पुलिस ने अभियान चलाकर हम लोगों को शहरों के बाहर बसने के लिए जमीन दी और मजदूरी करने के लिए प्रेरित किया। कारण है कि गांव हो या शहर हमारी बस्तियां शहर के बाहरी इलाकों में होती हैं। पेट भरने के लिए मजदूरी करते हैं।

: चौहान

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आया गांव के एक 22 साल के लड़के पर। वृद्ध के बेटे का कहना था कि लखमाराम मर्डर से एक दिन पहले शाम के वक्त मेरे घर आया था। (खबर पढ़ें)

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