बरकत 50 रु. में ऑर्केस्ट्रा में काम करते थे, आज एक फिल्म की फीस 3 लाख | Barkat Ali of 3.8 feet costs Rs 50. I used to work in an orchestra, today the fee for a film is 3 lakhs.

3: कुमार उपाध्याय

आज हम बात करेंगे एक ऐसे कलाकार की जिसका कद महज 3.8 फीट है, मगर जिंदगी में मुश्किलें बड़ी-बड़ी झेलीं। अली। जब 5-6 साल के थे तो गांव से सर्कस वाले चुपचाप इन्हें उठा ले गए। झगड़े के बाद इन्हें छुड़ा पाए। में मुंह से खून आने की बीमारी थी और जुबान दो हिस्सों में कटी हुई थी। सुन नहीं पाते थे और मां को रात को दिखना बंद हो जाता था। 50 . किया। लोग चिढ़ाते थे कि बौना है तेरी शादी नहीं होगी, लेकिन बरकत ने शादी की वो भी लव मैरिज, एक सामान्य कद की लड़की से। किस्मत थोड़ी पलटी तो फिल्मों में काम मिला, एक फिल्म के 3 लाख तक मिलने लगे। ही नहीं, लंदन में भी इनके नाम के चर्चे हुए।

बरकत अली की कहानी उन्हीं की जुबानी…

सुन नहीं सकते थे, मां को रात में नहीं दिखता था

जन्म कर्नाटक के गांव चित्रादुर्गा में 7 मई 1984 को हुआ। ही स्ट्रगल शुरू हो गया। पिता सुन नहीं पाते थे, मां को रात में दिखाई नहीं देता था। क्लास में पहुंचे तो मां को दिन में भी दिखना बंद हो गया। ️ था। को शराब की लत थी तो वो घर भी कम ही आते थे। घर में मां हमारा ख्याल रखती थी, लेकिन उसे रात में दिखना बंद हो जाता था तो हम 5 भाई और 1 बहन उनका ख्याल रखते थे।

से खून आता था, जुबान दो हिस्सों में थी

में जब मेरी मां मुझे गोद में ऊपर उठाती थी, तो उसके पूरे कपड़े खून से सन जाते थे। मुंह से खून आता था, लेकिन मैं रोता ही नहीं था। डर जाती थी कि खून कहां से आ रहा है। के दो सिरे थे। जब मां गोद से उतारती थी, तो मैं मछली जैसे लहराते हुए पूरी जमीन में घूमता था। पास से गुजरने वाले सब गाड़ी रोककर मुझे देखने आते थे। मैं बहुत छोटा था। बहुत हैरानी से देखते थे कि ये बच्चा ऐसा कैसे कर सकता है। मुझे देखकर परेशान रहती थी तो उसने दादा पहाड़ जाकर मन्नत मांगी, जिससे मैं ठीक हो सका। समय बाद मेरे मुंह से खून आना बंद हो गया और मेरी जुबान भी ठीक हो गई।

ने किडनैप कर लिया, ने छुड़वाया

में एक बार सर्कस वाले मुझे उठाकर ले गए थे। यहां बहुत फेमस था। लोग हमारे गांव आए थे, जहां वो टेंट लगाकर रहते थे। ने मुझे देखा था। पहले तो उन्होंने मेरे मां-बाप से मुझे ले जाने का पूछा, लेकिन जब उन्होंने भेजने से मना किया तो एक दिन वो मुझे जीप में किडनैप करके ले गए। लोग मुझे खिलाते-पिलाते थे। भी था। गांव के ही किसी बच्चे ने देखा था कि वो लोग मुझे ले जा रहे हैं। ने मेरे घर में बताया। -बाप बहुत परेशान हुए। के बाद मैं मिला। समय मैं सिर्फ 5-6 साल का था। मेरे घर वाले सर्कस वाले पहुंचे तो बहुत हंगामा हुआ। लोग तब भी यही कहते रहे कि इस बच्चे को हमें दे दो, लेकिन घरवालों ने ये कहते हुए इनकार कर दिया कि ये हमारा बहुत लाडला बच्चा है।

ऐसी है कि घरवाले सब मुझे बहुत प्यार करते थे। मैं कहीं भी जाता, तो लोग कभी मुझे साइकिल में छोड़ते तो कभी बाइक में। बुलाता था तो कभी एक रुपया देता कभी दो रुपया दे देता था। मीडियम से पढ़ाई की है। स्कूल में मैंने डांस सीखा, फिर जहां भी फंक्शन होता था, मैं जाकर करता था। समय मैंने सोचा कि कुछ करना है, कुछ हासिल करना है। कहते थे ये टिंगा सा आदमी क्या कर सकता है। में बहुत मेहनत करता था और स्कूल में फर्स्ट आता था। , गेम, लिखाई, डांस हर एक्टिविटी में हिस्सा लेता था। मुझे रोज बैठाकर समझाती कि बेटा तुझे कुछ करना चाहिए। है दुनिया से पीछे रह जाएगा। मेरे पिता शराबी थे, उन्होंने कभी मुझे टाइम नहीं दिया, वो ज्यादातर घर से बाहर ही रहते थे। थे। घर में पानी भर जाता था।

ठान लिया था कुछ अलग करना है

जब मैं छठी क्लास में था, तब मैंने ठान लिया कि कुछ करना है। ऑर्केस्ट्रा वाला हमारे घर आया। उसने मेरी मां से कहा कि आप अपने बेटे को हमारे प्रोग्राम में भेजिए, हम उसे अच्छे से हाईलाइट करेंगे। बनाएंगे। मां ने उनसे कहा, हमारा बेटा नाच-गाना नहीं करेगा, वो पढ़ने वाला बच्चा है, उसे इन सब से डिस्ट्रैक्ट मत करो। उसे दिया। मैं बार-बार उस ऑर्केस्ट्रा वाले के घर जाता और उससे कहता कि मां से बात करो, मैं आऊंगा। बार-बार इनकार कर देती थी। एक बार मैं अपनी मां के पास गया और कहा, मुझे कुछ हासिल करना है। से पैसे मांगे, उन्होंने भी इनकार कर दिया। खुद वो ऑर्केस्ट्रा जॉइन कर लिया। रोज के 50 रुपए मिल जाया करते थे।

मैं स्टेज पर डांस करता था और देखने वाले मुझे 100, 200, 500 रुपए टिप दिया करते थे। वो पैसे ले जाकर घर में देता था तो घरवाले खुश हो जाते थे। -ही-देखते मुझे और पैसे मिलने लगे। कपड़े तक नहीं थे। कमाता और उनसे कपड़े और किताबें खरीदता।

में हुई टैलेंट की तारीफ

बेंगलुरु में एक रवींद्र कला क्षेत्र में मैं 2003 में स्टेट लेवल डांस कॉम्पिटिशन में फर्स्ट आया। मुझे एक शील्ड और 5 हजार रुपए ईनाम मिले। अमिताभ के गाने गंगा किनारे वाला पर डांस किया था। ही एक मेरा बौना दोस्त स्पोर्ट्स में था। कहा मुझे भी स्पोर्ट्स में जाना है। तब 2009 में पूरे गिड्डे (बौने) लोगों को जमा करके वर्ल्ड डांस गेम्स नदर्न आइलैंड कॉम्पिटिशन होना था। का सिलेक्शन चल रहा था। से लेकर रनिंग के लोग भी चाहिए थे। रनिंग हुआ। मेरा सिलेक्शन हुआ और टूर्नामेंट लंदन में हुआ। 3 जीते। के अखबारों में मेरे नाम के साथ बड़ी तस्वीर छपी। भी मैंने कई गोल्ड मेडल जीते।

मेडल जीतते हुए मुझे फिल्मों की लिंक मिली। गांव के ऑर्केस्ट्रा में एक आदमी एक टिंगे आदमी की तलाश में था। उसने कहा- तुझे करना है तो जाकर बात कर ले वहां तुझे 200 रुपए रोज के मिलेंगे। कहा मुझे पैसे से मतलब नहीं है, लेकिन एक्टिंग करना है। पहली फिल्म कन्नड़ की KA99B333 थी। ऑटो के नंबर प्लेट पर था। वहीं काम करते-करते मुझे दूसरी फिल्म अभिमानी मिली। फिल्मों का सिलसिला आगे बढ़ता गया।

लोग कहते थे बौना है तेरी शादी नहीं होगी

में मेरे साथ खेलने वाले मुझे चिढ़ाते थे कि ये बौना है इसकी शादी नहीं हो सकती। था। छोटा था, लेकिन मैं किसी से डरता नहीं था। बड़े भाई का भी सपोर्ट था। मैं उन लोगों से कहता था कि जो मैं करके दिखाता हूं वो तू करके दिखा। डांस करूंगा क्या तू मेरे जैसे करके दिखा सकता है। के टीचर मुझे बहुत पसंद करते थे। मारता था।

घर पर भी सब कहते थे, तू बच्चा है तेरी शादी नहीं होगी। मैं अपनी मां से कहता था, मेरी शादी करवा दो, मैं ऑर्केस्ट्रा में जाता हूं, वहां लड़कियां मुझे खूब पसंद करती हैं। मेरे घरवाले कहते थे, तू बच्चा है, जिससे शादी करेगा, उसकी जिंदगी बर्बाद कर देगा। मैं कहता था आप करवा दो, वर्ना मैं बाहर कहीं शादी करके घर बसा लूंगा।

दो बेटियों के साथ बरकत अली।

दो बेटियों के साथ बरकत अली।

की लड़की से की लव मैरिज

जमाने में मैं बहुत पैसे कमाता था, बहुत फेमस था। मेरे मामू की बेटी, बचपन से ही मजाक किया करती थी कि मैं तुमसे ही शादी करूंगी। देखते वो सीरियसली मुझे पसंद करने लगी। घरवालों को मनाया और शादी कर ली। ऑर्केस्ट्रा बुलाया था, डांस भी किया। एक साल बाद बच्चा भी हुआ। दो बेटियां हैं, दोनों सामान्य कद की हैं, कोई शारीरिक दिक्कत नहीं है।

में घिर गया तंगहाली में

में सबसे ज्यादा तकलीफें हुईं। बंद हो गया, भी नहीं होते। गया। के लिए पैसे नहीं थे। -तैसे हमने दिन गुजारे। मैं ऑर्केस्ट्रा में काम करता हूं। अब भी मुझे पैसों की जरूरत होती है, तो यहां के लोग मुझे बुला लेते हैं। मैं भी एक-दो प्रोग्राम करने के बाद अपनी वाइफ और बच्चों के साथ घर में समय बिताता हूं। रिस्क लेता।

बरकत अली जो कभी खाने के भी मोहताज थे, आज उनके पास खुद का घर, कार, बाइक और हर जरूरत का सामान है।

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48 साल से नहीं ली एक भी छुट्टी: मां की मौत के दिन भी करते रहे अमिताभ का मेकअप, शूटिंग के बाद अंतिम संस्कार किया

जंजीर से लेकर गुडबाय तक पिछले 48 साल से अमिताभ बच्चन के साथ एक इंसान है। सावंत। ये बिग बी के मेकअप आर्टिस्ट हैं और पिछले 48 सालों से बिना एक भी दिन छुट्टी लिए ये काम कर रहे हैं। काम के लिए दीपक के डेडिकेशन को इसी बात से समझा जा सकता है कि जब उनकी मां की मौत की खबर उनके पास पहुंची अमिताभ बच्चन का ही मेकअप कर रहे थे।

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सबसे महंगी राजस्थानी फिल्म बनाकर दिवालिया हुए थे सागर:जिस टॉकीज के बाहर सालों तक चाय बेची, उसी के पर्दे पर हीरो बनकर आए

शुरुआती दिनों में ये जयपुर के लक्ष्मी मंदिर टॉकीज के बाहर चाय बेचते थे। तक ये सिलसिला चला। फिर वक्त ने करवट ली और एक दिन वो आया कि इसी लक्ष्मी मंदिर टॉकीज में वो फिल्म लगी, जिसमें ये हीरो थे। एक चाय वाले से एक्टर-डायरेक्टर बनने की सागर की कहानी काफी दिलचस्प है। हीरो बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए इन्हें सालों तक स्ट्रगल करना पड़ा। पहले दूध बेचते थे, फिर टॉकीज के बाहर चाय, फिर फिल्मों के सेट पर स्पॉट बॉय बने, ऑफिस बॉय बने, ड्राइवर भी रहे, फिर असिस्टेंट डायरेक्टर और एक दिन फिल्म के हीरो बन गए।

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325 तरह से साड़ी बांधने वाली डॉली जैन:घरवालों के सोने के बाद रात 3 बजे तक प्रैक्टिस करती थीं, अब एक्ट्रेसेस को पहनाती हैं साड़ी

खुद साड़ी पहनने से नफरत करने वाली डॉली ने सुपरस्टार श्रीदेवी के कहने पर साड़ी पहनाने को अपना प्रोफेशन बनाया और आज वो हर बड़ी एक्ट्रेस की फेवरेट हैं।डॉली की क्लाइंट लिस्ट में लेकर नयनतारा तक कई बड़ी एक्ट्रेसेस शामिल हैं। के घर में शादी हो या किसी फिल्म स्टार की, दुल्हन को साड़ी पहनाने का काम इनका ही होता है। डॉली 325 तरह की साड़ी बांधना जानती हैं, ये वर्ल्ड रिकॉर्ड उनके नाम दर्ज है। और वर्ल्ड रिकॉर्ड भी है, मात्र 18.5 सेकेंड्स में साड़ी पहनाने का।

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हेमा मालिनी से श्रीदेवी तक की बॉडी डबल रहीं रेशमा- 5 महीने की प्रेग्नेंट थीं तब स्टंट के लिए पहली मंजिल से लगा दी थी छलांग

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