हिजाब बैन पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज, 10 दिनों तक दोनों पक्षों ने रखी दलीलें – karnataka hijab ban supreme court verdict inside detail ntc

हिजाब विवाद कहने को एक राज्य से हुआ, जिस कदर बढ़ा, तरह से सड़कों देखने को निकलकर एक राष्ट्रीय मुद्दा बन गया. कोर्ट ने लगातार 10 दिन तक इस पूरे मामले पर सुनवाई की, मुस्लिमों का पक्ष जाना, , से बात कई तरह के विचारों को बाहर आने का गया. तमाम दलीलों को सुनने के बाद फैसले की घड़ी आ गई है. में हिजाब पर जो लगा वो ठीक गलत, निर्णय होने वाला है. गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच फैसला सुनाएगी.

सकता है सुप्रीम कोर्ट का फैसला?

सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला क्या आने वाला है, तो कुछ ही स्पष्ट हो पाएगा, लेकिन कुछ संभावनाएं जरूर सामने रखी जा सकती हैं. विवाद पर क्योंकि दो जजों की बेंच सुनाने जा रही है, में पहली संभावना तो ये की मामले को लेकर अलग राय रहे, यानी कि अलग फैसले. ऐसा होता है तो हिजाब विवाद का ये पूरा केस बड़ी बेंच को सौंप दिया जाएगा और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का दौर फिर शुरू हो जाएगा. इस मामले में दोनों जजों ने समान फैसला सुनाया तो स्थिति में कोर्ट का वो अंतिम निर्णय माना जाएगा.

SC की कॉज लिस्ट के मुताबिक दोनों जजों जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया ने अपना अलग अलग फैसला लिखा है. जजों की हिजाब बैन पर क्या राय ये तो फैसला जाने के ही साफ होगा.

उन तर्कों की भी की जानी चाहिए, जिस पर हिजाब बैन वाला ये पूरा विवाद टिका हुआ है. इस पूरे विवाद को लेकर सिर्फ दो पक्ष हैं- एक वो जो हिजाब है, दूसरा पक्ष वो जिसकी नजर में स्कूल में हिजाब पहनना गलत है. दो पक्षों पर सुप्रीम कोर्ट में कुल 10 दिन की सुनवाई हुई थी. से क्या रहीं, उस पर हैं.

पक्ष में क्या दलीलें रहीं?

सुप्रीम कोर्ट में जब इस की सुनवाई थी, सबसे सरकार उस सर्कुलर बहस छिड़ी हिजाब पर बैन लगाने की बात हुई थी. अब याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट में जोर देकर कहा कि राज्य सरकार ने क्या सोचकर आजादी के 75 साल बाद यूं हिजाब पर प्रतिबंध लगाने की सोची? में किस आधार पर राज्य सरकार वो सर्कुलर लेकर आई थी, ये स्पष्ट नहीं हो पाया.

के दूसरे देशों के कुछ उदाहरण देकर भी हिजाब पहनने को सही ठहराया गया था. कोर्ट के सामने अमेरिकी सेना के कुछ नियम बताए गए थे तो पश्चिम के दूसरे देशों में दिए गए अधिकारों का भी जिक्र हुआ था. बताया गया कि अमेरिका में सेना में भर्ती लोगों को पहनने की इजाजत रहती है.

…अलग मान्यताएं, की खूबसूरती

सुनवाई के दौरान तर्क ये भी रहा भारत में अलग धर्म के लोग रहते हैं, अपनी होती हैं, लेकिन फिर भी सभी एकता के साथ एक दूसरे के साथ रहते हैं. गया कि हिजाब किसी भी कीमत पर देश की एकता अखंडता पर कोई खतरा नहीं बनता है. कोई तिलक लगाना चाहता है, पहनता है, तो वो उसका है, उसकी मान्यता है, ऐसा करने का अधिकार है. मुस्लिम महिलाओं को भी हिजाब पहनने का हक है.

कोर्ट में एक दलील भी पेश गई थी कि मुस्लिम लड़कियों जब से हिजाब पहनने से रोका , में उनका ड्रॉप आउट लेवल बढ़ा है. वजह से शिक्षा का अधिकार जो सभी को दिया गया है, छात्राएं उससे वंचित रह जाएंगी. ये तमाम दलीलें तो याचिकाकर्ताओं के वकील सुप्रीम कोर्ट के सामने रखीं, लेकिन इन्हीं दलीलों के जवाब के वकीलों द्वारा भी तर्क दिए गए. तरफ से यूनिफॉर्म की अहमियत, स्कूल में धार्मिक पहनावे बचाव जैसे मुद्दों पर विस्तार से बात की गई.

सरकार दलील दलील

में सुनवाई के दौरान पहले राज्य सरकार सर्कुलर पर रही, ऐसे में सरकार की तरफ से जो वकील पेश , उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी राय रखी. देकर कहा गया कि सर्कुलर में किसी भी तरह के धार्मिक को नहीं छुआ गया. भी लगा वो सिर्फ क्लास तक सीमित रखा गया. ये भी जानकारी गई कि कर्नाटक सरकार 10वीं तक सभी छात्रों को मुफ्त है, कारण भी ये है कि बच्चों को पढ़ाई का बेहतर वातावरण मिल सके.

पूरी सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने PFI की भूमिका को लेकर भी कई सवाल दागे थे. आरोप लगाया गया था कि इस पूरे मामले में छात्राओं को भड़काने का काम काम PFI ने किया. तरफ से सोशल मीडिया के जरिए छात्राओं से हिजाब अपील की गई थी. हिजाब पहनकर जाने की बात कही गई थी. पहले तक कर्नाटक के स्कूलों हिजाब को लेकर कोई विवाद नहीं था.

तर्क ये भी रखा गया कि हिजाब पहनने या ना पहनने कोई महिला कम इस्लामी नहीं हो जाती है. के दौरान फ्रांस का उदाहरण देते हुए कहा था कि वहां पर हिजाब पर प्रतिबंध लगाया गया है, लेकिन उस प्रतिबंध से वहां की कम इस्लामी नहीं हो जाती हैं. ईरान में महिलाएं इस समय हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं, वे हिजाब नहीं पहनना चाहती हैं. से स्कूलों में यूनिफॉर्म की संस्कृति चलती है, ये समानता और एकरूपता के लिए बनाई गई है.

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