Diwali 2022: रामायण में इन 2 लोगों ने दिया था सबसे बड़ा बलिदान, 14 साल ऐसे जिया जीवन – Diwali 2022 laxmana urmila not ram sita made bigger sacrifice in ramayana tlifdn

भगवान राम जब 14 साल काटकर अयोध्या वापस लौटे तो अयोध्यावासियों ने पूरी नगरी को दीपक से सजाया था. हैं कि तभी से दीपावली त्योहार मनाया जा है. के अनुसार, राम अयोध्या के राजा दशरथ और के सबसे बड़े पुत्र थे. अन्य पुत्र लक्ष्मण, शत्रुघ्न थे. वाल्मीकि की रामायण के अनुसार, भगवान राम को 14 साल के वनवास पर जाना , उनके साथ पत्नी सीता और छोटे भाई लक्ष्मण थे.

को भगवान विष्णु का माना जाता है वहीं, को माता लक्ष्मी का. में राम और सीता से एक पवित्र जीवन जीने और लोगों की भलाई बदले में बलिदान करने की उम्मीद की गई थी. दौरान दो लोग ऐसे थे, जिन्होंने बिना सोचे समझे अपने कर्तव्य को निभाया. के ये दोनों पात्र हमेशा दुख, और कर्तव्यों से बंधे रहे.

शत्रुघ्न, और उनकी पत्नी सुमित्रा की थे. में, को राम का छोटी भाई होने के साथ उनके एक अच्छे साथी रूप में भी दर्शाया गया है. फिर चाहे बात 14 साल के वनवास की हो या रावण के खिलाफ लड़ाई की, लक्ष्मण हमेशा ही अपने बड़े भाई राम के आगे एक सुरक्षा कवच के रूप में खड़े रहे.

रामायण में लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला के जीवन, उनके दुख और पीड़ा के बारे में पर्याप्त जानकारी उपबल्ध नहीं है. उर्मिला राजा जनक और रानी सुनयना की दूसरी बेटी और सीता की छोटी बहन थी.

राम और सीता के विवाह तय होने के साथ ही लक्ष्मण उर्मिला का विवाह भी तय हो गया था. अलावा शत्रुघ्न का विवाह श्रुतकीर्ति और भरत का विवाह मांडवी के साथ तय हुआ था.

कैकई की इच्छा के मुताबिक, भगवान राम ने अयोध्या छोड़ने और 14 साल के वनवास की बात बताई तो पीछे नहीं हटे. बिना कुछ सोचे समझे अपने बड़े भाई और उनकी पत्नी साथ जाने और उनकी रक्षा करने का फैसला लिया.

बाद, लक्ष्मण के लिए सबसे मुश्किल काम उर्मिला को के बारे में बताना था. के लिए यह सबकुछ सुन पाना काफी मुश्किल था लेकिन लक्ष्मण के पास उर्मिला को बताने अलावा और कोई भी नहीं था.

को भगवान राम माता के साथ जाने की सुनाने के लक्ष्मण ने उर्मिला को की रानी उनके माता और का ख्याल रखें.

-उर्मिला

को समझाते हुए लक्ष्मण ने , कि आप जानती हो, मैं मां सीता और भाई राम सेवा करने एकमात्र उद्देश्य वन की ओर जा रहा हूँ. दिन और रात उनकी सेवा में लगानी चाहिए. मुझे तुम्हारी चिंता होगी जिस कारण में भाई और भाभी सही तरह से सेवा नहीं कर पाऊंगा. कभी भी इस बात की चिंता नहीं करनी चाहिए कि मैं आपके साथ नहीं हूं. मेरे जाने के बाद आपको हमारे माता-पिता और अयोध्यावासियों का ख्याल रखना होगा.

की सारी बात सुनने के उर्मिला ने ज्यादा हिम्मत दिखाई. पति की ओर भगवान रात की सेवा की बात को समझते हुए उर्मिला लक्ष्मण से वादा लेते हुए कि के वनवास के दौरान उनके में बिल्कुल भी नहीं सोचेंगे.

इस अनुरोध की व्याख्या करते हुए उर्मिला ने कहा, जंगल में, राम आपके पिता समान होंगे और सीता माता समान. उद्देश्य उन दोनों की सेवा करना होना चाहिए. हमारी चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. पति के इस निर्णय का पूरी तरह से साथ दिया सही रास्ते पर चलने की बात कही.

का बलिदान

हम सभी को रामायण के मुख्य किरदारों के बारे में और उनके नाम याद हैं जैसे, भगवान राम, माता सीता, लक्ष्ण , भरत, शत्रुघ्न, हनुमान, बाली, सुग्रीव, साथ ही कौशल्या, सुमित्रा, कैकई, मंदोदरी, शबरी लेकिन शायद ही किसी के बारे में ज्यादा जानकारी होगी.

लक्ष्मण जब अपने भाई और भाभी की रक्षा के लिए उनके साथ वनवास पर चले गए थी जिन्होंने के आदेशानुसार ख्याल रखा और अपने कर्तव्यों को पूरा किया. भले ही उर्मिला वनवास नहीं गई लेकिन तक महल में रहते हुए भी अपनी जीवन वनवास की तरह की काटा.

अपने पति को अगले 14 वर्षों तक बिना बाधा के सेवा करने देने लिए, उर्मिला ने नींद की अपने पति ओर से गहरी नींद देने का अनुरोध किया.

में रहते हुए भी उर्मिला ने कभी भी महल के एशो नहीं अपनाया और ना ही उन्होंने किसी से कोई शिकायत की ना ही किसी को जिम्मेदार ठहराया. वही सब किया जो उन्हें सही लगा.

उर्मिला जीवन

पौराणिक कथाओं में बताया गया है लक्ष्मण अपना फैसला सुनाने लिए अपने कक्ष में की से तैयार थी बेशकीमती आभूषण और ताज भी था. उर्मिला को इस देखकर को ही नहीं दुख में थे में उर्मिला कैसे इतना -श्रृंगार कर सकती है. उर्मिला को इतना तैयार देखकर ने जोर चिल्लाते हुए , माता कैकई से भी बदतर हो, तुम्हें अपने पति के साथ से ज्यादा महल का ऐशो-आराम पसंद है. तुम्हें अब अपनी पत्नी स्वीकार नहीं करता और हमारा ये पवित्र बंधन टूट गया है. रास्ते जा हूं.

उर्मिला नहीं चाहती थी कि भाई-भाभी की सेवा करते हुए भी लक्ष्मण को उनकी याद आए. ने ये सब किया ताकि लक्ष्मण को उनसे नफरत हो और वो अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर सकें.

प्रक्रिया में, उर्मिला ने खुद को समर्पित कर दिया और एक साधु की तरह ही जीवन जिया. ने कभी भी इस बारे किसी से बात की. वापस लौटने के सीता को एहसास कि उर्मिला और लक्ष्मण के बीच चीजें सही नहीं है उन्होंने से बात , सीता के बहुत दबाव डालने के बाद उर्मिला ने सारी बातें बताई. इस पर सीता माता ने – तुम्हारे वैभव की तुलना 100 सीताएं मिलकर भी नहीं कर सकतीं. से बात करूंगी और नफरत को खत्म करने की कोशिश करूंगी.

लक्ष्मण के सामने भी सारी सच्चाई आ गई. लक्ष्मण को अपनी गलती का एहसास हुआ और वह उर्मिला से मिलने के लिए गए. इससे पहले की वह उर्मिला से माफी मांगते, निद्रा की देवी आईं और उन्होंने उर्मिला को उनका वादा याद दिलाया.

उर्मिला ने 14 सालों तक एक साधु की तरह जीवन बिताया और महल के सभी ऐशो -आराम को छोड़ दिया अलावा उन्होंने पति की में तरह से निभा सकें. ना कभी उर्मिला ने किसी से शिकायत की और ना बदले में उन्हें कुछ मिला.

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