Meerut Mulayam Singh Update: Maharaj Singh Bharti Gave First Ticket To Mulayam Singh Yadav – मेरठ: महाराज सिंह ने दिलाया था ‘नेताजी’ को पहला टिकट, मलियाना में कुएं से निकलवाए थे शव, पढ़ें अनसुने किस्से

सपा संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव अब नहीं रहे, मगर उनकी यादें मेरठवासियों के जहन में आज भी ताजा हैं। उनका गहरा नाता था। के कई लोग हैं, जिनसे वह हमेशा संपर्क में रहे।

पिछले मुलायम सिंह से जुड़े रहे सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष और राजपाल सिंह और पौत्र मनीष भारती बताते हैं कि मुलायम सिंह कई और सार्वजनिक सिंह कही महाराज सिंह ने 1967 में लिए जसवंत नगर से टिकट कराया था। महाराज सिंह समाजवादी सोशलिस्ट पार्टी के ऑब्जर्वर बनाकर भेजे गए थे, जिन्होंने उनका टिकट फाइनल किया था।

राजपाल सिंह बताते हैं कि वैसे तो मुलायम सिंह यादव मेरठ में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के साथ आते रहते थे, लेकिन 5 दिसंबर 1989 को मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार वह 13 दिसंबर 1989 को मेरठ में रुड़की रोड पर आरवीसी में आए थे। यहां तत्कालीन राष्ट्रपति उस कार्यक्रम में आ रहे थे, उनके अगुवानी करने के लिए आए थे। के बाद वह लालकुर्ती थाने के सामने व्हाइट हाउस के नाम से बने कार्यालय में बैठे थे। राजपाल सिंह, वहां जिलाधिकारी से कहा कि राजपाल सिंह को बुलवाइए। पार्टी के जिलाध्यक्ष हैं। एक गाड़ी हमारे गांव रजपुरा और दूसरी गाड़ी कचहरी भेजी। बाद में मैं उन्हें आरएस के नाम से एक रेस्टोररेंट था, उसमें मिला। अलावा उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान आरक्षण विरोधी आंदोलन चला तो वह उन्हें कार में बैठकर बागपत ले गए, जहां मीटिंग हुई और आंदोलन शांत कराया गया। के बरनावा में झगड़ा हो गया था, तो वहां भी गए थे।

…जब सड़क किनारे करवाई शेविंग

निवर्तमान जिलाध्यक्ष बताते हैं कि बात 1977 की है। यादव कॉपरेटिव मिनिस्टर थे। में कॉपरेटिव शाखा का उद्घाटन करने के लिए आए थे। चल रहे थे, तो उनकी दाढ़ी बढ़ी हुई थी। मंत्री होते हुए भी कितने सरल थे, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है मोदीनगर में सड़क किनारे अपनी गाड़ी रुकवाई और वहीं कुर्सी और शीशा लगाकर बैठे एक हेयर ड्रेसर से शेविंग कराई।

कुएं से निकलवाए थे शव

सिंह, 1987 मेरठ में दंगा हुआ था। मुलायम सिंह यादव मेरठ आए थे। तब वह राजपाल सिंह, विधायक शाहिद मंजूर के पिता मंजूर अहमद, सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी आदि के साथ थे और वहां पता चला कि कुएं में कुछ शव पड़े हैं तो वहां खड़े होकर शव निकलवाए थे। थी, वहीं खड़े रहे थे। लखनऊ में एक सम्मेलन में भी उन्होंने यह बात दोहराई थी।

की तेरहवीं में हेलिकॉप्टर से आए

से विधायक भोपाल सिंह की 1991 में पीएल शर्मा जिला अस्पताल में हत्या कर गई थी। सिंह सीडीए ऑफिस के बराबर में इनकी कोठी पर तेरहवीं में आए थे। पहले से किसी को नहीं दी गई थी। पुलिस लाइंस उतरे थे। संजय अग्रवाल ज्वाइंट सेक्रेटरी थे, जिनका फोन डीएम, एसएसपी और राजपाल सिंह के पास आया था कि मुख्यमंत्री आ रहे हैं, मगर किसी को बताना नहीं है।

अग्निकांड के बाद भी आए थे मेरठ

साल 2010 में हुए विक्टोरिया पार्क अग्निकांड के बाद भी मुलायम सिंह यादव मेरठ आए थे। दौरान कुछ लोगों ने उनके खिलाफ नारेबाजी कर दी थी। हुआ था, जिसमें पूर्व मंत्री अब्बास का कुर्ता फट गया था। कांड के बाद उन्होंने पीड़ितों को मुआवजा भी दिलवाया था।

नाम पर मेडिकल कॉलेज का नाम

भाजपा डॉ. अग्रवाल ने खरखौदा में एक मेडिकल कॉलेज बनवाया है, जिसका नाम पर मुलायम सिंह यादव मेडिकल कॉलेज था। 2015 मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसका उद्घाटन किया था। . सपा में एमएलसी थीं। बाद में उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली और करीब तीन साल पहले उसका नाम बदलकर एनसीआर मेडिकल कॉलेज कर दिया गया।

कठोर

पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने मुझे सीख दी थी कि हमेशा मुलायम रहो, लेकिन जो सही है, उसके लिए निर्णय कठोर लो। बहुत थी। बार मिल जाता था, भूलते नहीं थे। हर 15 दिन के भीतर हर जिले के जिलाध्यक्ष और पार्टी के अन्य लोगों से बात कर जिले का हालचाल लेते थे। – , जिलाध्यक्ष,

50 नहीं, रुपये माफ कर दिया

व्यापारियों का सम्मेलन हो रहा था। उस समय सिनेमा एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने मांग रखी कि सिनेमा पर जो टैक्स सरकार को जाता है उसमें से छोड़ दिए जाएं तो उसका उपयोग सिनेमा मालिक अपनी आय में कर सकेंगे। मुलायम सिंह मुख्यमंत्री थे। उन्होंने उसी समय कहा कि 50 पैसे नहीं एक रुपये हम माफ कर चुके हैं। वादा करो कि प्रदेश के किसी भी सिनेमा हॉल में शौचालय बेकार और बदबूदार नहीं मिलेगा। अलावा विपक्ष में रहते हुए मुलायम सिंह यादव ने मेरठ में सभा की और व्यापारियों से मिले।

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