World Mental Health Day: एंग्जाइटी डिसऑर्डर के बारे में बात करना जरूरी, जानिए स्ट्रेस से कैसे है अलग – World Mental Health Day 2022 anxiety disorder symptoms what is the difference between stress and anxiety how to treat anxiety lbse

भी परेशानी या समस्या हल तब निकलता है, बारे में बात करते हैं. शारीरिक रूप से फिट फील नहीं करते तो हम खुलकर बारे में कर पाते हैं. लेकिन जब हम मानसिक रूप से फिट फील नहीं करते तो चुप्पी साध लेते हैं. के बारे में बात में आज भी कई लोग हिचकिचाते हैं. लोग मेंटल हेल्थ की बात को मजाक में लेते हैं कुछ लोग बकवास बताते हैं. वजह है कि हमारे तो उसके बारे में बात नहीं करता. डर होता है कि उसे जज करेंगे या उसका मजाक उड़ाएंगे. लेकिन मेंटल हेल्थ के बारे में लोगों को जागरुक करने के लिए हर साल दुनिया में 10 अक्टूबर को मेंटल हेल्थ डे मनाया जाता है.

WHO द्वारा मेंटल हेल्थ डे मनाने के पीछे एक वजह ये है कि लोग मानसिक स्वास्थ के बारे में जागरुक हो सकें. एक अच्छा जीवन जीने के लिए जितना हमारा शारीरिक स्वास्थ्य जरूरी होता है, ध्यान हमें अपने मानसिक स्वास्थ्य पर भी चाहिए. के समय में बहुत से लोग एंग्जाइटी और एंग्जाइटी डिसऑर्डर से गुजर कर रहे हैं. बारे में ज्यादा जानकारी न होने के चलते वो कभी समस्या पर ही नहीं करते.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, जब विश्व में कोरोना महामारी नहीं तब में से व्यक्ति किसी तरह के मेंटल डिसऑर्डर को झेल रहा था. , WHO की मानें तो कोरोना महामारी के पहले साल में दुनियाभर में एंग्जाइटी और डिप्रेशन के मामले 25 प्रतिशत तक बढ़ गए थे. WHO के मुताबिक, कोरोना में एंग्जाइटी बढ़ने के पीछे एक सबसे बड़ी वजह थी कोरोना के चलते लोगों का एक दूसरे से अलगाव. इसके अलावा अकेलापन, का डर, प्रियजनों की मृत्यु का शोक और वित्तीय चिंताओं के चलते भी एंग्जाइटी और डिप्रेशन के मामलों में वृद्धि हुई थी. समस्या कई तरह की हो सकती हैं. एक है एंग्जाइटी और एंग्जाइटी डिसऑर्डर. हैं कैसे एंग्जाइटी और डिसऑर्डर हमारी लाइफ को प्रभावित करते हैं.

स्ट्रेस और एंग्जाइटी डिसऑर्डर में फर्क?
जिस वक्त में हम रह रहे हैं, उसमें लगभग हर व्यक्ति स्ट्रेस जरूर महसूस करता है. एंग्जाइटी डिसऑर्डर से काफी अलग है. किसी भी वजह से हो सकता , जैसे कि स्टेज पर परफॉर्म में, किसी टेस्ट को लेकर उस स्थिति से बाहर आएंगे आप स्ट्रेस फ्री हो जाते हैं. , एंग्जाइटी की स्थिति में आपको लगातार किसी न किसी लेकर डर लगा रहता है. कभी-कभी बिना किसी स्ट्रेस की स्थिति में भी एंग्जाइटी हो सकती है. साइकियाट्रिक एसोसिएशन के मुताबिक, एंग्जाइटी इस कदर खतरनाक हो है कि अटैक भी झेलने पड़ सकते हैं. , एंग्जाइटी डिसऑर्डर किसी भी व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी असर डालने लगता है.

को एंग्जाइटी डिसऑर्डर होता है, उन्हें तमाम तरह की सामना करना पड़ सकता है. अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन की मानें तो एंग्जाइटी डिसऑर्डर मेंटल हेल्थ में सबसे आम समस्या है. लगभग 30 प्रतिशत व्यस्क इस डिसऑर्डर से गुजरते हैं. बता दें कि आप इस समस्या का उपचार कर सकते और इससे पा सकते हैं.

भी तमाम तरह के होते हैं. जनरलाइज्ड एंग्जाइटी डिसऑर्डर, डिसऑर्डर, एंग्जाइटी डिसऑर्डर और सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर.

डिसऑर्डर और इसके लक्षण
अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन के मुताबिक, एंग्जाइटी डिसऑर्डर में लगातार चिंता होती है, आपकी रोजमर्रा की गतिविधियों में खलल डालती है. डिसऑर्डर शारीरिक लक्षणों के साथ हो सकती है. चलते आपको बेचैनी, में समस्या, फोकस करने में समस्या, और मांसपेशियों में तनाव जैसी चीजें महसूस हो सकती हैं. इस डिसऑर्डर में अक्सर चिंताएँ की चीज़ों नौकरी की ज़िम्मेदारियों, या मामूली मामलों जैसे काम, कार की मरम्मत से जुड़ी होती हैं.

और लक्षण
से पीड़ित व्यक्तियों को लगातार खौफ महसूस होता है. डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्ति इतना घबरा जाते हैं कि उसे हर वक्त ऐसा महसूस होता है जैसे वो किसी बड़ी बीमारी या किसी बड़ी परेशानी में है. जब भी इन व्यक्तियों को पैनिक अटैक आता है, ये लोग इतना घबरा हैं कि उन्हें हार्ट अटैक कोई मेडिकल समस्या हो रही है. अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन की मानें तो पैनिक डिसऑर्डर की शुरुआत औसत आयु 20-24 है. या PTSD जैसे अन्य मानसिक विकारों के साथ पैनिक अटैक की उत्पन्न हो जाती है.

लोगों को पैनिक डिसऑर्डर होता , पैनिक अटैक के समय घबराहट है, उनका हार्ट रेट काफी बढ़ जाता है. उन्हें ऐसा महसूस होने लगता है कि वो सांस नहीं ले पा रहे, में दर्द की शिकायत होती है.

डिसऑर्डर और इसके लक्षण
ऑफ मेंटल हेल्थ के मुताबिक, सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर एक बहुत कॉमन एंग्जाइटी डिसऑर्डर है. सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्ति को उन स्थितियों में चिंता या भय के महसूस होते , जहां उन्हें लगता है कि लोग उन्हें जज करेंगे. मीटिंग्स, पब्लिक स्पीकिंग, , के लिए इंटरव्यू सोशल वाले व्यक्तियों के लिए बड़ी समस्या होती है. डिसऑर्डर से पीड़ित लोगों भीड़ में बाहर निकलने, लोगों से डर होता है.

ऑफ मेंटल हेल्थ की मानें तो सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर मर्दों मुकाबले महिलाओं में ज्यादा पाया जाता है. सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर का ट्रीटमेंट समय से न कराया जाए तो बहुत सालों तक किसी भी व्यक्ति में रह सकता है. सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर से पीड़ित लोग जब किसी भीड़ के बीच होते हैं या लोगों के बीच होते हैं उन्हें काफी पसीना आने लगता हैं. की बढ़ है. से बात करते वक्त नजरें मिलाकर बात करते.

डिसऑर्डर और इसके लक्षण
सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्ति को उन लोगों से अलग का भय रहता , वो जुड़ाव महसूस करते हैं. लगातार ये डर सताता रहता कि वो उन लोगों से अलग हो जाएंगे, जिनके साथ उनका करीब का रिश्ता है. डर की वजह से सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर वाले व्यक्ति को कोई भी काम करने का दिल नहीं करता और न ही वो कहीं फोकस कर पाते हैं. के लक्षण ज्यादादर बचपन में ही दिखने लगते हैं और बार तक तक रहते हैं. जो सबसे कॉमन लक्षण , वो ये है कि जिन लोगों एंग्जाइटी डिसऑर्डर होता है, वो अक्सर लोगों के बिना बाहर जाते जिनसे वो सबसे ज्यादा प्यार करते हैं. वो हरपल उन लोगों के साथ रहने की जिद्द करते हैं, जिनके वो करीब होते हैं.

से कैसे निपटें?
इनमें से आप कोई भी लक्षण से जूझ रहे हैं तो पहले तो अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव लाने की कोशिश करें. कई बार हमारी लाइफस्टाइल भी एंग्जाइटी का कारण है. एक्सपर्ट्स का मानना ​​​​ कि किसी भी एंग्जाइटी डिसऑर्डर से निपटने लिए आपको अपना खान-पान अच्छा रखना चाहिए. ही, आपको अपना एक स्लीपिंग रुटीन बनाना चाहिए और उसे फॉलो करना चाहिए. लाइफस्टाइल में एक्सरसाइज भी जोड़नी चाहिए. लोगों से बात करनी चाहिए, जिनपर आप भरोसा करते हैं और जो बातों को सकारात्मकता से सुनेकर आपको बेहतर सुझाव दे सकें.

ये भी बताते हैं कि अगर आप किसी भी तरह के एंग्जाइटी डिसऑर्डर जूझ रहे हैं तो आपको कैफीन नहीं लेना चाहिए. ऐसी कोई भी चीज नहीं या पीनी जिसमें कैफीन हो. एंग्जाइटी को ट्रिगर है.

आपको डॉक्टर की मदद लेनी है?
आप अपनी लाइफस्टाइल में ऊपर दिए गए बदलावों शामिल करते हैं और उसके भी आपको काफी दिनों स्थिति सुधार नहीं लगता है तो आपको मेडिकल हेल्प लेनी चाहिए. टॉक थेरेपी और दवाइयों जरिए आपकी एंग्जाइटी को क्योर करते हैं. थेरेपी और दवाइयों, दोनों की मदद से आप छुटकारा पा सकते हैं.

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